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एकादशी एवं चातुर्मास्य पर प्रश्न

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प्रश्न: क्या आप कृपया एकादशी का अर्थ बता सकते हैं ? उत्तरः इसका अर्थ है चन्द्र पखवाड़े का ग्यारहवाँ दिवस। मन इन्द्रियों का स्वामी...   Read More

व्यसन का अर्थ है मन की गुलामी

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साधारणतः ‘व्यसन’ शब्द का प्रयोग नकारात्मक अर्थों में किया जाता है। इसे शराब और तम्बाकू जैसे मनोसक्रिय पदार्थों के सम्बन्ध में परिभाषित किया गया...   Read More

क्या श्री नित्यानंद प्रभु माधुर्य-भाव प्रदान कर सकते हैं?

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हाल ही में मुझे भक्तों से कुछ ईमेल प्राप्त हुए, जिसमें पूछा गया कि क्या मेरे गुरुदेव ने कहा है कि श्री नित्यानन्द प्रभु...   Read More

काल्पनिक कथा, गोत्र की महिमा एवं गोपाल मन्त्र

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प्रश्न: वर्तमान समय में, अन्य सांस्कृतिक साहित्य को सामान्य एवं बौद्धिक जनता द्वारा काल्पनिक कथाओं के रूप में समझा जाता है। इनमें हिन्दू, ईसाई,...   Read More

सम्बन्धों में समस्याओं का समाधान

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मैं जिन विभिन्न समस्याओं पर परामर्श देता हूँ, उसमें से परस्पर सम्बन्धों में आने वाली समस्या का विषय भी होता है । केवल दम्पति...   Read More

सुखप्राप्ति की प्रेरणा कहाँ से आती है ?

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केवल मनुष्य ही नहीं, अपितु प्रत्येक प्राणी में सुखप्राप्ति की प्रेरणा होती है । यह प्रवृत्ति जन्म से ही होती है । इस प्रवृत्ति...   Read More

  • Satyanarayana Dasa

    Satyanarayana Dasa
  • Daily Bhakti Byte

    It is a natural tendency of the senses to go for sense objects. Every sense has got its raga (like) and dvesha (dislike). You don’t even need intelligence for that. The sense itself is designed for that. The sense becomes attracted or repelled, and then whether you act on it or not has to do with your intelligence. Restraint is done with intelligence, which is very difficult to do because you are not trained for that. But if Bhakti is there, then restraint comes naturally.

    — Babaji Satyanarayana Dasa
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