एकादशी एवं चातुर्मास्य पर प्रश्न

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प्रश्न: क्या आप कृपया एकादशी का अर्थ बता सकते हैं ? उत्तरः इसका अर्थ है चन्द्र पखवाड़े का ग्यारहवाँ दिवस। मन इन्द्रियों का स्वामी...   Read More

तुलसी के पत्तों का उचित उपयोग

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प्रश्न: भौतिक उद्देश्यों के लिए तुलसी के पत्तों का उपयोग करने से बचने के लिए मैं आपसे तुलसी के बारे में पूछना चाहता हूं।...   Read More

व्यसन का अर्थ है मन की गुलामी

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साधारणतः ‘व्यसन’ शब्द का प्रयोग नकारात्मक अर्थों में किया जाता है। इसे शराब और तम्बाकू जैसे मनोसक्रिय पदार्थों के सम्बन्ध में परिभाषित किया गया...   Read More

क्या श्री नित्यानंद प्रभु माधुर्य-भाव प्रदान कर सकते हैं?

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हाल ही में मुझे भक्तों से कुछ ईमेल प्राप्त हुए, जिसमें पूछा गया कि क्या मेरे गुरुदेव ने कहा है कि श्री नित्यानन्द प्रभु...   Read More

काल्पनिक कथा, गोत्र की महिमा एवं गोपाल मन्त्र

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प्रश्न: वर्तमान समय में, अन्य सांस्कृतिक साहित्य को सामान्य एवं बौद्धिक जनता द्वारा काल्पनिक कथाओं के रूप में समझा जाता है। इनमें हिन्दू, ईसाई,...   Read More

महाभारत युद्ध, महाजन एवं धर्म के स्रोत

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प्रश्न: भीष्म एवं द्रोण कौरवों के पक्ष में क्यों हैं ? अन्ततः भीष्म एवं द्रोण अच्छे व्यक्ति हैं । उत्तरः भीष्म ने स्वयं युधिष्ठिर...   Read More

गौड़ीय सम्प्रदाय के सर्वश्रेष्ठ प्रामाणिक अधिकारी

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प्रश्नः भिन्न मतों में निर्णय करने हेतु किन आचार्यों को सर्वश्रेष्ठ अधिकारी मानना चाहिये ? उत्तरः चैतन्य महाप्रभु हमारे सम्प्रदाय के प्रतिपादक हैं ।...   Read More

  • Satyanarayana Dasa

    Satyanarayana Dasa
  • Daily Bhakti Byte

    Have you ever seen a camel grazing? It goes here and there for food and it never comes back. Similarly, our mind is like a camel mind, running here and there and it never comes home. Our mind is going somewhere all time time, getting the food of raga (like) and dvesha (dislike). That is its food. It is getting its energy from that. We are always moving in the grooves of like and dislike. We have to bring it back from there. That is the sadhana. Are you in yourself or are you somewhere else?

    — Babaji Satyanarayana Dasa
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